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पढ़े,सीमांचल स्थित धिमेश्वर महादेव अमृत्व वरदान कथा ।

 बिहार, सीमांचल स्थित पुर्णिया के बनमनखी अनुमंडल क्षेत्र के काझी हृदयनगर पंचायत के धीमा ग्राम में अवस्थित धीमेश्वर नाथ महादेव मंदिर की कथा सेकड़ो वर्ष पुरानी है।

जिसका उद्भव एवं निर्माण के पीछे कई असमान्य घटना की कथा सुनने को मिलती है।
कहा जाता है कि सैकड़ो वर्ष पूर्व धीमा ग्राम के पवाय उर्फ बोकाय रजक कुदाल से खेत में जंगलो को सफा कर रहा थे। उसी क्रम में उसकी कुदाल जमीन में दबे शिवलिंग पर लग गई और रक्त की धारा निकलने लगी । यह खबर पूरे क्षेत्र में जंगल की आग की तरह फैल गई। जब इसकी सूचना चंपानगर स्टेट के राजा को हुई तो वे अपने सदलबल के साथ उक्त स्थल पर पहुंचे और शिवलिंग को उखड़वाने लगे लेकिन अथक प्रयास के बाबजूद भी शिवलिंग नहीं उखड़ा तो राजा ने इसे ईश्वरीय शक्ति का रूप समझ कर छोर दिया। इसके बाद राजा व्यक्तिगत रूप से मंदिर निर्माण हेतु ईट का भट्ठा लगवाया। लेकिन जब कार्य सम्पादित कर ईट पकाने के लिए अग्नि प्रज्वलित करने लगी तो उसी समय प्रचंड आंधी-तूफान आयी और सब पर पानी फिर गया । कहा जाता है कि ऐसा कई बार हुआ और उस ईट भट्ठी में अग्नि प्रज्वलित नही हो सकी । फलतः ईट तैयार नही हुई। कहा जाता है कि कुछ समय बाद राजा को स्वप्न में भगवान ने व्यक्तिगत तौर पर नही जन सहयोग से मंदिर निर्माण कराने का आदेश दिया । इस बीच इसी गांव के एक गरीब ब्राह्मण प्रताप नारायण झा जो एक बहुत बड़ा शिव उपासक थे । जिन्होंने मंदिर निर्माण का प्रण ठान लिया एवं गांव-गांव जाकर चंदा जमा करने लगे। कई वर्षो तक हुए चंदे से प्राप्त धन राशि से सार्वजनिक मंदिर का निर्माण किया गया। इस शिवलिंग की खास विशेषता यह है कि इस तरह का शिवलिंग सिर्फ रामेश्वरम में है एवं स्पस्टिक और पारदर्शी है।


कुछ ग्रंथो और बुजुर्गो के मुताबिक हिरण्यकश्यपु भी इस जगह महादेव की उपासना की थी। जिससे उसको अमृत्व का वरदान मिला था। कहा जाता है कि भक्त प्रह्लाद भी इस जगह धीमेश्वर नाथ शाहदेव की पूजा-अर्चना करते थे। अभी यह जगह कोशी- सिमांचल क्षेत्र के लोग मिनी बाबा धाम के नाम से भी लोग जानते है। यहां सावन के महीने में भगवा वस्त्र पहनकर हजारों-हजार कमरिया कर्णप्रिय जयघोष के साथ उत्तर वाहिनी मनिहारी गंगा से जल भरकर के करीब सौ किलोमीटर की कठिन एवं कष्टप्रद यात्रा तय करके बाबा धीमेश्वर नाथ महादेव को जलाभिषेक करते है । यहां प्रतिवर्ष महाशिवरात्रि के अवसर पर विशाल मेला लगता है ।
शिवरात्री में बाबा धीमेश्वर नाथ महादेव की पूजा करने के लिए आप सहरसा-मधेपुरा की तरफ से ट्रेन या फिर बस मार्ग से तो आपको बनमनखी बस स्टैंड आना होगा। इसके अलावा आप यदि पूर्णिया की तरफ से आते है तो भी आपको बनमनखी बस स्टैंड उतरना ही होगा । अररिया के भरगामा ब्लाक एवं रानीगंज ब्लॉक की तरफ से आते हैं तो आपको काझी, हरमुढी-रसाढ एवं बैरख-मलिनियां की तरफ से आपको बाबा मंदिर आना होगा। बनमनखी बस स्टैंड से महज 2.5 किमी की दूरी पर अवस्थित बाबा मंदिर उक्त बस स्टैंड से जीप, टेंपू रिक्शा आदि वाहन चलती है । बहुत लोग इतना कम दूरी पैदल भी बाबा का नाम लेकर चले आते है । इस रूट चार्ट के आधार पर आप बाबा मंदिर आ सकेंगे। श्रद्धालु के वाहनों के लिए तय रूट में अनुमंडल प्रशासन कि ओर से हर वर्ष वाहन पारकिंग की भी व्यवस्था की जाती है।

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