जन्मजात टेढ़ा पैर का ईलाज संभव–डॉ0 उमेश कुमार

 

ब्यूरो रिपोर्ट पश्चिम चम्पारण   बेतिया। जन्मजात टेढ़ा पैर जिसे क्लब फुट कहा जाता है। इस विकृति में प्रभावित पैर अंदर एवं नीचे के तरफ मुड़ा हुआ रहता है। यह विकृति प्रति हजार नवजात शिशु में किसी एक को प्रभावित करती है। यह बीमारी बिना किसी स्थायी कारण के होते है। जन्मजात टेढ़ा पैर का ईलाज संभव है। बशर्ते जन्मके तुरन्त बाद ईलाज शुरू कर दिया जाए। उक्त बातें पश्चिम चम्पारण जिला के बेतिया के स्थानीय अस्पताल रोड स्थित नारायणी सुपरस्पेसलिस्ट ऑर्थोपेडिक अस्पताल के हड्डी, जोड़, रीढ़ एवं नस रोग विशेषज्ञ एवं बिहार ऑर्थोपेडिक एसोसिएसन के जिला सचिव डॉ0 उमेश कुमार ने एक प्रेस वार्ता में क्लब फुट जागरूकता अभियान के तहत बताया। डॉ0 उमेश कुमार ने यह भी बताया कि इस बीमारी को कवक प्लास्टर के द्वारा ठीक कर सकते है। अगर जन्म के दूसरे या तीसरे दिन से 7-10 दिन के अंतराल पर प्रभावित पैर में एक विशेष रूप का प्लास्टर लगाया जाए।

 

पैर ठीक होने पर जूता पहन कर रहना पड़ता है।जो 3 से 5 वर्ष के उम्र तक पहनना होता है। आगे डॉ0 उमेश कुमार ने बताया कि वे अभी तक लगभग 125-150 बच्चों में इस प्रकार के बीमारी का ईलाज कर चुके है। अभी तक किसी बच्चों में सर्जरी की आवश्यकता नही पड़ी। डॉ0 उमेश कुमार ने सभी आम नागरिकों से अपील किया हैं कि इस प्रकार के जन्मजात टेढ़ा पैर के बच्चों के अभिवाहको को जन्म के तुरंत बाद चिकित्सक से परामर्श लेने को जागरूक करें। क्योकि विलम्भ से ईलाज करवाने पर पैर सौ फीसदी ठीक नही हो सकेगा एवं सर्जरी की भी जरूरत पड़ सकती है।

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