नीतीश कुमार के विकास दावा, 1994 से लेकर आज तक प्रखण्ड कार्यलय को अपना भवन नही ।

  बिहार में डबल इंजन की सरकार होने के बाबजूद बिहार में विकाश की हालत क्या है । इस तस्वीर को देख आप अंदाजा लगा सकते है । एक तरफ सुसाशन बाबू बिहार में अधिकारियों को विकाश के लिए शक्त निर्देश देते है , वही दूसरी तरफ सरकारी कार्यलय 1994 ई0 से लेकर आज तक अपने विकाश की बाट जोह रहा है ।

  वही सरकारी कार्यलय है जहाँ से गांव तक विकाश करने का दावा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार करते आ रहें हैं।

बतादे की पुर्णिया जिला में कुल पन्द्रह प्रखण्ड कार्यलय कर्यरत हैं
उन में से एक प्रखण्ड कार्यलय डगरुआ की स्थापना 1994 में पंचायत भवन में स्थापित किया गया था लेकिन आज 24 वर्ष बीत जाने के बाबजूद विभाग की ओर से प्रखण्ड कार्यलय के लिए जमीन मुहैया नही कराया जा सका है। ऐसे में प्रखण्ड कार्यलय में गांव तक विकाश पहुचाने का दावा कितना सच साबित हो सकता है,वही हालअंचल कार्यलय का है जहाँ जमीनी रिकॉर्ड, सरकारी फाइलो को रखने की समुचित व्यवस्था तक नही है।

  वही बात स्वच्छता, स्वास्थ, सुरक्षा एंव सम्मान की करे तो बिहार सरकार की निर्मल आँचल योजना बाबुओं की ऑफिस टेबल तक ही सीमित है । हालात ऐसी है की लोगो को इस कार्यलय में आना हो तो कार्यलय में लगे कचरे के अम्बार से गुजरना पर रह पड़ता है ।

  इन तमाम बातों पर प्रखण्ड विकास पदाधिकारी उमेश प्रकाश सिहं का कहना है की 1994 से लेकर आज तक प्रखण्ड कार्यलय का अपना भवन नही है जिससे असुविधा का सामना करना पर रहा है ।

प्रखण्ड कार्यलय के नाम जमीन आवंटित की जानकारी देते हुए अंचल कर्मी लालबाबू रजक का कहना है की भवन के लिए 14 एकड़ जमीन का प्रपोजल सरकार के नाम भेज दिया गया है अब तक क्यो नही जमीन आवंटित हुआ है इसकी पूर्ण जानकारी अंचल अधिकारी देगें ।

वही अंचल अधिकारी इन तमाम बातों पर कुछ भी जबाब देने से साफ तौर पर नकार दिया है ।
लेकिन खुफिया तोर पर इस मुद्दे पर अचंल अधिकारी से जो बात चीत हुआ है ,उस से यह लगता है कि कही न कही विभाग की लापरवाही को छुपाने की कोशिश की जा रही है ।

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