हाई प्रोफाइल ड्रामा के बीच महापौर उपचुनाव महाउत्सव सम्पन, सब की निगाहें न्ययालय की ओर।

 बिहार के पुर्णिया नगर निगम चुनाव 16 जून 2018 को 46 वार्ड के पार्षदों के बीच बड़ी ही गहमागहमी सम्पन हुआ था।
वार्ड नं0 42 की पार्षद विभा कुमारी ने अपने विपक्ष को पटकनी देते हुए जीत हासिल कर  26 वार्ड पार्षदों की विश्वास हासिल कर मेयर की कुर्सी पर बिराजमान हो गई ।

क्या क्या हुआ इन दो वर्षों के बीच?

इन दो वर्षों के बीच महापौर विभा कुमारी और उन्के पति जदयू के वरिष्ठ कार्यकर्ता जितेंद्र यादव पर निगम के कर्यो पर मनमानी के आरोप लगते रहे , दो वर्ष की अवधि पूर्ण होते ही वार्ड 3 के पार्षद सबिता सिंह ने अपने 20 पार्षद के हस्ताक्षर के साथ 10 जुलाई 18 को जिला नगर निगम आयुक्त को लिखित आवेदन देकर कहा कि निगम के कार्यो में महापौर मनमानी ढंग से कार्य कर रही है । साथ उन्को मेयर पद के लिए अविश्वाश लगाना चाहते है उन्के खिलाफ अविश्वाश के पक्ष में करीब 30 पार्षद अपनी सहमति देने के लिए तैयार है।

नगर निगम आयुक्त रामा शंकर प्रसाद ने मेयर पद पर बने रहने के लिए 28 जुलाई 18 को निगम कक्ष में सभी 46 पार्षदों की उपस्थिति निर्धारित कर मत हासिल करने की बात की ।

मत हासील की होड़ में पक्ष और विपक्ष ने अपने अपने और से पार्षदों को अहोभगत में लग गये ।
दोनों ओर के जानकार कहते है की एक एक वार्ड पार्षदों की कीमत करीब 15 से 20 लाख तक राशि देते हुए इन की अहोभगत के लिए अपनी अपनी निगरानी में देश विदेश कि सैरसपाटे भी कराए गए है।
इन मुँह मांगी कीमत और सैरसपाटे के बीच दो महिला पार्षद का हरण का मामला पुर्णिया पुलिस थाना से लेकर पटना हाईकोर्ट तक पहुच गया ।

 जिसमें न्ययालय ने पुर्णिया पुलिस को शक्त निर्देश देते हुए अविलम्भ सुरक्षा के साथ महिला पार्षद को उपस्थित करते हुए बयान दर्ज कराने के लिए आदेश जारी किये थे।
हरण की गई महिला पार्षद की न्ययालय में उपस्थिति के दौरान मेयर के करीब 50 समर्थक के खिलाफ पुर्णिया पुलिस ने पटना में एफआर दर्ज कराया है।

वही न्ययालय में हरण की गई महिला ने अपहरण होने से साफ इंकार कर दिया ।
पुर्णिया पुलिस टीम ने दोनों पार्षद महिला को अपनी सुरक्षा में 28 जुलाई को होने वाली अविश्वाश पारित बैठक में उपस्थित जहाँ दिनों ने मेयर के खिलाफ अविश्वास लगाने में सहमति प्रदान की ।
इस दौरान निगम के क्षेत्र में सदर अनुमंडल अधिकारी बिनोद कुमार के आदेश पर 200 मीटर तक धारा 144 लगा दिया गया था पूरी तरह से निगम का क्षेत्र छावनी में तब्दील हो चुका था ।
अचानक ही निगम के गेट के सामने अफरातफरी का माहौल देखने को मिला देखा गया कि वार्ड 3 के पार्षद पति प्रताप सिंह अपनी लाइसेंसी पिस्टल के साथ पुलिस के घेरे में है हलाकि तुरन्त ही प्रताप सिंह को पुलिस हिरासत में ले लिया साथ ही उन्के कुछ समर्थक को भी पुलिस ने हिरासत लिया ।
अविश्वाश पर मोहर लगने के बाद पूर्व मेयर विभा कुमारी ने मीडिया के समक्ष बयान देने से बचती रही उन्हों ने सिर्फ इतना कहा की अभी पद खाली हुआ है ,चुनावी समय निर्धारित होना बाकी है ।

राज्य चुनाव निर्वाचन आयोग ने 10 अगस्त को मेयर पड़ के लिए चुनाव होना निर्धारित किया इस दौरान इन सभी हाईप्रोफाइल ड्रामा और घटनाओं के बीच पूर्व मेयर की ओर से पटना उच्य न्ययालय में याचिका दायर किया गया । याचिका की सुनवाई के बाद न्ययालय ने cf-wrtiy संख्या 1795, 1796, एवं 1883 /2018 में आदेश एवं सुझाव अवलोकन के साथ डीआईजी की जांच को देखते हुए राज्य निर्वाचन आयोग एवं जिला प्रसासन को यह निर्देश दिया है।
1. चुनाव आयोग के क्लास 1 अधिकारी एवं पुलिस अधिकारी जो डीआईजी के पद से अन्यून हो कि उपस्थिति में सम्पन करवाया जाय।
2.चुनाव परिणाम जब तक कि अदालत के अगले तिथि को आदेश न मिल जाए तब तक घोषित नही की जाएगी ।
वही न्ययालय के आदेश अवलोकन में जिला प्रसासन की उपस्थिति में चुनाव कराया गया । जहाँ विपक्ष की ओर से 24 पक्ष की ओर से 22 पार्षदों ने चुनाव में उपस्थित हुए ।

अब देखना बाकी है की क्या 24 पार्षदों के मत हासिल करने के बाद विपक्ष मेयर की कुर्सी हासिल कर पाता है , या फिर न्ययालय के आदेश के बाद कही पूर्व महापौर का ही मेयर की कुर्सी पर कब्जा रहेगा ।

सब की निगाहें न्ययालय की और ।

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