भीख मांगते बच्‍चों का भविष्‍य बनाने को शुरू की 17 हजार किमी की पदयात्रा

 युवा इंजीनियर आशीष शर्मा ने बाल भिक्षावृत्ति रोकने के लिए एक अनोखे अभियान की शुरुआत की है।

दिल्‍ली के आशीष का उद्देश्‍य देश से बाल भिक्षावृत्ति खत्‍म करना है

पुर्णिया, सड़कों पर भीख मांगते बच्‍चों को लगभग हम रोज ही देखते हैं। कई लोग उन्‍हें कुछ पैसे देते हैं तो कुछ लोग ऐसा न करने की नसीहत देकर चलते बनते हैं। वहीं, कुछ लोग उनकी इस हालत के लिए सरकार को कोसते हैं। जबकि सच्‍चाई यह है कि लगभग हर प्रदेश में भिक्षावृत्ति को रोकने के लिए सरकारी स्‍तर पर विभाग भी हैं और योजनाएं भी। इतना ही नहीं ज्‍यादातर शहरों में भिक्षुक गृह भी बने हैं, लेकिन उनमें से अधिकतर खाली ही हैं। ऐसे में दिल्‍ली के युवा इंजीनियर आशीष शर्मा ने बाल भिक्षावृत्ति रोकने के लिए एक अनोखे अभियान की शुरुआत की है। आशीष पूरे देश में 17 हजार किलोमीटर की पदयात्रा कर इसे रोकने के लिए लोगों को जागरूक कर रहे हैं।
68 % अपराध यही बच्चे करते है और यही कारण है पुलिस की ड्यूटी मुस्किल होती जा रही है ।

युवा पीढ़ी को जोड़ना है लक्ष्‍य ।

आशीष के मुताबिक, मैं कक्षा छह से ही वृद्धाश्रम जा रहा हूं। जल्‍द ही मुझे अहसास हो गया कि इस समस्‍या का जड़ बच्‍चों में ही है। अगर बच्‍चे ही खुश नहीं होंगे तो बुजुर्ग कैसे सुखी रह सकेंगे। सड़कों पर हजारों बच्‍चे भीख मांगते दिख जाते हैं, लेकिन कोई उनके लिए कुछ नहीं करता है। मैं उनके लिए कुछ करना चाहता था, लेकिन मुझे पता था कि व्‍यक्तिगत रूप से 50 से 100 बच्‍चों से मिल सकता था। इसलिए मैंने अपने लक्ष्‍य को पाने के लिए पूरी युवा पीढ़ी को जोड़ने की शुरुआत की।

‘लोगों की भावनाओं को जगाना है’

मैकेनिकल इंजीनियर आशीष ने देश को बाल भिक्षावृति से मुक्त करने के लिये जॉब छोड़ दी और बीती 22 अगस्‍त 2017 से इसे पूरे करने के लिए पदयात्रा पर निकले हुए हैं।

दुआएं फाउंडेशन के तहत 17 हजार किमी. की पदयात्रा को आशीष ने उनमुक्‍त इण्डिया का नाम दिया है। इस अभियान के तहत देश के 29 राज्‍यों व 7 केंद्र शासित राज्‍यों के 4900 गांवों में बाल भिक्षावृत्ति को रोकने के लिए जागरूक किया जाएगा। उनका कहना है कि मैं लोगों को यह बताना चाहता हूं कि भीख मांगते बच्‍चों को गाली न दें और न भिख और शोषण करने के बजाय उन्‍हें समाज की मुख्‍यधारा में शामिल करने में मदद करें।

आशीष कहते हैं कि मैं लोगों की भावनाओं को जगाना चाहता हूं, मुझे लगता है कि जब उनको पता चलेगा कि कोई 17 हजार किलोमीटर सिर्फ बाल भिक्षावृत्ति रोकने के लिए पैदल चल रहा है तो उसका असर जरूर होगा और असर हो रहा है देश भर से आज युवा साथ खड़ा है।

टीचर्स व अधिकारियों से भी ले रहे सहयोग

अपने इस अभियान के तहत आशीष स्‍कूल-कॉलेजों के प्रिंसिपल और अधिकारियों से भी मिलकर जागरूकता फैलाने के लिए सहयोग मांग रहे हैं। बाल  भिक्षुकों को समाज में शामिल कर एक बेहतर भविष्‍य देने की कवायद में उनको  सहयोग भी मिल रहा है। वह आगामी 14 जून 2019 को उनमुक्‍त दिवस मनाने की तैयारी कर रहे हैं जिसमे कोशिश है 10 लाख लोगो को एक साथ जोड़ने की। वह चाहते हैं कि इस आयोजन में लोग भीख मांगने वाले बच्‍चों की बेहतर शिक्षा दिलाने व एक आदर्श समाज बनाने की शपथ लें।

आशीष एक मोबाइल एप भी डेवलप कर रहे हैं, जिसकी मदद से पांच किलोमीटर के दायरे में किसी भी बाल भिक्षुक दिखने पर उसकी जानकारी अपलोड की जाए ताकि आसपास के पुलिस अधिकारी व अनाथाश्रम उस बच्‍चे की मदद कर सकें।

अभी तक जम्मू, हिमाचल , पंजाब , हरयाणा, राजस्थान, गोआ , दमन , सिलवासा , महाराष्ट्र , मध्य प्रदेश , उत्तराखंड , उत्तर प्रदेश का सफर तय कर चुके है ,जहाँ 2 करोड़ से अधिक बच्चे भिख न देने की स्पथ ले चुके है ।

आशीष 7352 की.मी की पदयात्रा करते हुए बक्सार – आरा – पटना – छपरा -गया – नालंदा – बिहार सरिफ – लखी सराय – बेगुसराय – शहरसा – मधेपुरा – पुरनिया पहुचे।

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