रामगढ़ में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया अम्बेडकर जयंती।

 

क्षेत्र के कई जगह अम्बेडकर जयंती की रही धूम।
रामगढ़ सदर (कैमूर) रामगढ़ प्रखंड के कई जगहों और दलित बस्तियों में डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जयंती मनाया गया रामगढ़ के अंबेडकर चौक पर डॉक्टर अंबेडकर की मूर्ति पर प्रगतिशील अंबेडकर युवा क्लब अकोढ़ी के कार्यकर्ता वह बसपा के नेताओं ने माल्यार्पण कर लोगों में मिठाइयां बांटी वही इस जयंती समारोह में राजनीतिक पार्टियों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया चुनाव में दलित वोट बैंक पर अपना दावा मजबूत करने के लिए सभी दल आंबेडकर जयंती के जरिए खुद को दलितों का मसीहा बताने में लगे हैं। एससी-एसटी ऐक्ट में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ भारत बंद में दलित संगठनों ने जिस तरह विरोध-प्रदर्शन किया उसके बाद से सभी पार्टियां इस आबादी को अपनी तरफ लुभाने के लिए लगी हुई है। आम चुनावों में अब एक साल का वक्त ही बचा हुआ है और कोई भी दल दलितों को लुभाने का मौका नहीं छोड़ना चाहती है। 
वक्ताओं ने डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा की डॉ भीमराव अंबेडकर भारतीय संविधान के पिता थे जिन्होंने भारत के संविधान का प्रारुप तैयार किया था। वो एक महान मानवाधिकार कार्यकर्ता थे जिनका जन्म 14 अप्रैल 1891 को हुआ था। उन्होंने भारत के निम्न स्तरीय समूह के लोगों की आर्थिक स्थिति को बढ़ाने के साथ ही शिक्षा की जरुरत के लक्ष्य को फैलाने के लिये भारत में वर्ष 1923 में “बहिष्कृत हितकरनी सभा” की स्थापना की थी। इंसानों की समता के नियम के अनुसरण के द्वारा भारतीय समाज को पुनर्निर्माण के साथ ही भारत में जातिवाद को जड़ से हटाने के लक्ष्य के लिये “शिक्षित करना-आंदोलन करना-संगठित करना” के नारे का इस्तेमाल कर लोगों के लिये वो एक सामाजिक आंदोलन चला रहे थे।
अस्पृश्य लोगों के लिये बराबरी के अधिकार की स्थापना के लिये महाराष्ट्र के महाड में वर्ष 1927 में उनके द्वारा एक मार्च का नेतृत्व किया गया था जिन्हें “सार्वजनिक चॉदर झील” के पानी का स्वाद या यहाँ तक की छूने की भी अनुमति नहीं थी। वास्तविक मानव अधिकार और राजनीतिक न्याय के लिये महाराष्ट्र के नासिक में वर्ष 1930 में उन्होंने मंदिर में प्रवेश के लिये आंदोलन का नेतृत्व किया था। भारतीय संविधान में राज्य नीति के मूल अधिकारों  और नीति निदेशक सिद्धांतों को सुरक्षा देने के द्वारा उन्होंने अपना बड़ा योगदान दिया। बुद्ध धर्म के द्वारा अपने जीवन के अंत तक उनकी सामाजिक क्रांति जारी र।ही। भारतीय समाज के लिये दिये गये उनके महान योगदान के लिये 1990 के अप्रैल महीने में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया मौके पर सभा की अध्यक्षता कर रहे रामधनी राम, रामगढ़ ब्लॉक प्रमुख निशा देवी, प्रमुख प्रतिनिधि उपेंद्र राम, राम बच्चन राम, छोटेलाल राम, नंदू भारती, सुग्रीव प्रसाद गुप्ता, वीरेंद्र राम, मोहन राम, राजेश कुमार, योगेंद्र सिंह, नोनार मुखिया प्रतिनिधि हरेंद्र मुसहर, पूर्णमासी मुसाहर, जंग बहादुर सिंह कुशवाहा सहित दर्जनों कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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