All for Joomla All for Webmasters
May 24, 2018
You can use WP menu builder to build menus

  राम कथा ज्ञान यज्ञ में शामिल श्रोतागण

न्युज (प्रीतम सुमन) अमरपुर (निसं) धन मनुष्य के भीतर संतोष पैदा करने का कारण नहीं हो सकता और जहाँ संतोष नहीं है वहाँ का सुख और शांति एक छलावा मात्र हैं।उक्त बातें प्रखंड क्षेत्र के खरदौरी गाँव में आयोजित श्री राम कथा ज्ञान यज्ञ के तीसरे दिन रामकथा के प्रवचनकर्ता अयोध्या वासी श्री श्री १०८ महंत रामकिंकर जी महाराज ने कही।उक्त कथन के समर्थन में भरत चित्र के उदाहरण को प्रस्तुत करते हुए इन्होंने कहा कि भैया भरत महाराजा दशरथ के उस संपत्ति को जिसे देख कुबेर भी शर्माते थे अस्वीकार कर प्रभु भक्ति को अपने जीवन में प्रधानता दी।परिणाम स्वरूप आज भी भैया भरत सांसारिक जीवन के मानक बिंदु के रूप में प्रस्तुत किये जाते हैं ।जो गुरू अपने शिष्य को आध्यात्म से विमुख कर भौतिक वादी सुख की और ले जाने की चेष्टा करता है वैसे गुरू के आदेश की अवहेलना करने में कोई बुराई नहीं है ।भरत को गुरू वशिष्ठ ने  जब राजसिंहासन पर आरूढ़ होने का आदेश दिया तो भरत जी ने राजसिंहासन त्याग कर भगवान श्री राम के चरण पादुका को सिंहासन पर रखकर स्वयं ब्रह्मचारी जीवन जीना स्वीकार किया ।प्रवचन के पुर्व स्थानीय भजन गायक मुकेश कुमार, कन्हैया जी ,गोपाल शर्मा,के द्वारा भजन प्रस्तुत कर मौजूद श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया ।इस कार्यक्रम में ग्रामीण रामबालक शर्मा, रामनारायण शर्मा,सन्टु शर्मा, संतोष शर्मा,संजीव कुमार, गोरेलाल,मंटुन शर्मा,अनिल शर्मा,दिलिप शर्मा,निरज कुमार,संजय शर्मा, रविन्द्र शर्मा,अमिताभ शर्मा,मुरारी कुमार समेत आस -पास के ग्रमीणों ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया।