नहीं रहे यायावर दिवाकर उर्फ़ पैदल बाबा !

बाॅका।प्रीतम कुमार
मंदार पर्वत पर विशाल और अद्भुत यज्ञ करके मंदार में विकास के लिए धन जुटाने का सपना देखनेवाले श्रद्धेय विद्यासागर पोद्दार ‘दिवाकर’ अब हमारे बीच नहीं रहे. उनका निधन कल 11 बजे खगड़िया में हो गया. श्री दिवाकर 86 वर्ष के थे. रविवार को अचानक उनकी तबीयत बिगड़ने पर कुछ लोगों ने उन्हें हॉस्पिटल में दाखिल कराया था. जबकि किसी प्रकार का रोग इन्हें नहीं था. ये यायावर थे.
‘चरैवेति’ इनका सूत्र वाक्य था. इस यज्ञ के लिए इन्होंने सहरसा, मधेपुरा, कटिहार, पूर्णिया, दरभंगा, समस्तीपुर, लखीसराय, बेगुसराय, बाँका, भागलपुर, पटना, हाजीपुर का भ्रमण कर लोगों में इस यज्ञ के प्रति अलख जगाया था.
सैकड़ों बार अकेले मंदार की परिक्रमा विगत दो वर्षों के अंदर ही करनेवाले दिवाकर जी पहले स्वामी रामदेव के साथ 22 वर्षों तक जुड़े रहे. इनकी औपचारिक शिक्षा मात्र चार तक थी लेकिन वेद, पुराण, उपनिषद, ज्योतिष, खगोल, वास्तु के बारे में गहन अध्ययन किया था.
पैदल यात्री, मितभाषी पुरुष और हरवक्त ज्ञान को बढ़ाने के लिए वे जाने जाते रहे. हरिद्वार में बाबा रामदेव की नौकरी छोड़कर इन्होंने 12 ज्योतिर्लिंगों की पैदल यात्रा की. ये विशुद्ध शाकाहारी थे और चमड़े की चीज़ों का बहिष्कार करते थे. योग्य ब्राह्मणों को बहुत सम्मान देते थे और ज्ञान के समक्ष आदरभाव इनकी विशेषता थी.
हमें अब भी विश्वास नहीं होता है कि आज दिवाकरजी हमारे बीच नहीं हैं.
ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दें! नमन उनको.

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