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April 26, 2018
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पूर्णियाँ (दिपेश दीपू) “कहते है डुबकियां सिंधु में ग़ोताख़ोर लगाता है, जा जा कर खाली हाथ लौट कर आता है । मिलते नहीं सहज ही मोती गहरे पानी में, बढ़ता दुगना उत्साह इसी हैरानी में। मुट्ठी उसकी खाली हर बार नहीं होती, कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती ।” जी हाँ एक बार फिर पूर्णिया के लाल डॉ वीरेश कुमार ने भारत के मानचित्र पर डंका बजाया है। 10 जनवरी को गोवा की राजधानी पणजी में होटल ग्रांड डेलमन मे आयोजित भव्य समारोह में वर्ष 2017 के ग्लोबल अचीवर्स अवार्डों की घोषणा की गई। जिसमें गोविंद हॉस्पिटल पूर्णियां बिहार के निदेशक डॉ. वीरेश कुमार को “हेल्थ केअर सर्विसेज” के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय उपलब्धि एवं महत्वपूर्ण भूमिका के लिए वर्ष 2017 का “चिकित्सा रत्न आवर्ड” एवं “स्वर्ण पदक ” से सम्मानित किया गया। ज्ञातव्य हो कि डॉ वीरेश के पिता भीम प्रसाद यादव प्र.अ.आदर्श मध्य विद्यालय बेलौरी पूर्णिया में कार्यरत हैं तथा जिनके बड़े पुत्र एवं पुत्रवधु विभेष आनंद एवं चंदा कुमारी भी प्रखंड विकास पदाधिकारी के रूप में कार्यरत हैं।
यह “चिकित्सा रत्न अवार्ड” ग्लोबल अचीवर्स फाउंडेशन की ओर से प्रो.सुरेंद्र सिरसत ,पूर्व स्पीकर गोवा विधानसभा द्वारा गोआ के पूर्व उपमुख्यमंत्री रमाकांत दत्ताराम कल्प, पूर्व केंद्रीय कानून मंत्री दयानंद मांड्रेकर, ग्लोबल अचीवर्स फाउंडेशन नई दिल्ली के सचिव ए.के.शर्मा , डॉ वी बी सोनी, नारायण बाबूराव राठौड़, सतीश पाटिल की उपस्थिति में डॉ वीरेश को दिया गया। विदित हो कि डॉ वीरेश ने अल्प अवधि में ही घुटने के आर्थराइटिस के इलाज में अपनी विशिष्ट पद्धति (कार्टिलेज मेटाबोलिक जनरेशन तकनीक ) के लिए वैश्विक स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई है। इन्होंने बिना घुटना प्रत्यारोपण एवं बिना सर्जरी के आर्थराइटिस प्रभावित घुटना को पुनः स्थायी रूप से अत्यंत कम खर्च में पूर्णतया क्रियाशील बनाने की नई तकनीक (एम.सी. जी. तकनीक) का अविष्कार एवं विकास करके बहुत सारे लोगों का सफल इलाज किया है।इतना ही नही आधुनिक जीवन शैली से दुष्प्रभावित ,ओल्ड एज ,मोटापा और दुर्घटना में घुटने की समस्या से जूझ रहे लोगों के जीवन को बिना सर्जरी एवं अत्यंत कम खर्च के स्वस्थ जीवन जी सकने की उम्मीद जगा दी है। ग्लोबल अचीवर्स फाउंडेशन ,नई दिल्ली के सचिव श्री ए.के.शर्मा ने डॉ वीरेश के कार्यों की सराहना करते हुए नेशनल एवं सोशल डेवलपमेंट में मील का पत्थर बताते हुए इसके व्यापक प्रचार प्रसार एवं आम लोगों तक पहुचाने की आवश्यकता पर बल दिया। डॉ वीरेश ने भी अपने संबोधन में इस तकनीक के बारे में एवं आम लोगों तक इसे सुलभ बनाने की कार्ययोजना की चर्चा की ताकि स्वस्थ समाज की परिकल्पना को साकार किया जा सके।