विवेकानंद शिक्षा जागृति युवा मंच ने मानाया विवेकानंद जयंती समारोह।

सिमरी बख्तियारपुर (निरंजन कुमार) 12जनवरी को विवेकानंद शिक्षा जागृति युवा मंच के कार्यालय परिसर में स्वामी जी के तेलीय चित्र पर पुष्प अर्पित कर सदस्यों ने मनाया स्वामी विवेकानंद जयंती समारोह।वहीँ कोषाध्यक्ष सुदर्शन ठाकुर ने ग्रामीण बच्चों को स्वामी जी के चरित्र को अपने में आत्मसात करने का आग्रह किया एवं वित्तीय प्रबंधक अमित कुमार रितेश ने सभी सदस्यों को स्वामी जी के द्वारा दिए ज्ञान को जनमानस तक पहुँचाने का शपथ दिलाया।प्रेम गौरव प्रखंड अध्यक्ष ने छात्रो को अनुशासन पूर्ण जीवन जीने का संकल्प दिलाया।वहीँ संस्था के अध्यक्ष व् उपाध्यक्ष श्री चितेश कुमार व् गुणानंद ठाकुर ने वीडियो कॉल के द्वारा सभी छात्रों व् सदस्यों को सनातन धर्म व् चरित्र निर्माण पर बताते हुए कहा की जीवन मे पुरुषार्थ:
मनुष्य का उद्देश्य सदैव आत्मबल की प्राप्ति होना चाहिए। आत्मबल से तेजस्वी व्यक्तिव का निर्माण, व्यक्तित्व से पुरुषार्थ कर उच्च आध्यात्मिक एवम सांसारिक वैभव की प्राप्ति स्वाभाविक है। हम प्रायः मनुष्यों का शरीर देख पाते हैं और सभी मनुष्यों का शरीर लगभग एक जैसा होता है -2 हाथ दो पैर आँख कान इत्यादि। परंतु मनुष्य के अंदर जो चेतना है वह अलग अलग मनुष्यों में पूर्णतः अलग अलग है। और यह अंतर इतना असाधारण है कि एक जैसे दिखने बाले प्रत्येक के अंदर चेतना रूपी एक अलग ही संसार होता है। चेतना के विशेष प्रभाव से ही कुछ व्यक्ति करोड़ो को नेतृत्व प्रदान कर जीवन में दिशा प्रदान करते हैं और कुछ सभ्यता के लिए विनाशकारी कार्यों में प्रवत्त रहते हैं।

मनुष्य जो भी व्यक्तित्व प्राप्त करता है या उसका निर्माण कर पाता है वह उसके अंदर उपलब्ध तेज और आत्मबल से ही संभव होता है। परिवर्तन प्रकृति का नियम है यह सत्य है परंतु आत्मबल और पुरुषार्थ से हम परिवर्तनों के सकारात्मक और नकारात्मक प्रभावों में अंतर ला सकते हैं।
जीवन में आत्मबल की कमी संघर्षों से बचने और साधारण मार्ग चुनने की आदत बनती जाती है। यहीं से धीरे धीरे जीवन मे पतन का आरंभ होता है। शरीर की शक्ति का क्षय, नैतिकता का क्षय, धन वैभव का क्षय, यश कीर्ति का नाश इत्यादि । यदि मनुष्य उच्च स्तर की शारीरिक क्षमता का मालिक हो, अथवा उच्च पद पर हो, अथवा जीवन की व्यवस्थाएं वैभव पूर्ण हो परन्तु यदि पतन का आरंभ हो तो ढह जाने में कोई समय नही लगता। तो आत्मबल से जनित पुरुषार्थ, नैतिकता, कर्मठता, शारीरिक एवम मानसिक स्वास्थ्य को बनाये रखने का प्रयास अनवरत जारी रहना चाहिए।

यधपि जीवन क्षण भंगुर है परंतु जब तक जीवन है इसमें ठोस एवम शक्तिशाली व्यक्तित्व का समावेश होना चाहिए।

दिखावे एवम आडंबरों से मनुष्य वास्तविक अर्थों में कभी बड़ा नही हो सकता ।इस मौके पर लोमश ठाकुर,राजवर्धन,वेदानंद,अंकित,अभिषेक, शुधांशु कौशिक,गोपाल,नवीन,भवेश ठाकुर, कुमार,नितीश कुमार, सुभाष यादव, विपिन ,नीरज पोद्दार,संजय साह,प्रीतम कुमार,ओम राज,प्रेम ताँती,एवं सभी सदस्य मौजूद थे।

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