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January 19, 2018
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ललन कुमार निराला मरौना (सुपौल):- 13 पंचायतों व 38 गांवों से सुसज्जित प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र मरौना की स्थिति बदहाली के दौर पर है, जिस कारणवश इस बाढ़ प्रभावित प्रखंड के मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। 1,62,372 लोगों की आबादी वाले पूरे प्रखंड में एक मात्र प्राथमिक स्वास्थ केन्द्र है। जबकि 4 अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र हैं, जिसमें से तीन में कार्य चल रहा है। वहीं 16 हेल्थ सब सेन्टर हैं,जिसमें 13 में कार्य चल रहा है। परन्तु यह सब कुछ कागजी स्तर पर ही है, क्योंकि पूरे प्रखंड क्षेत्र में स्वास्थ्य व्यवस्था की स्थिति काफी दयनीय है। यह प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र आउटडोर भवन में चल रहा है और भवन का कुर्सी जमीन के समतल हो जाने के कारण बरसात के समय उसमें पानी चला जाता है। इस पीएचसी   में एम्बुलेंस की भी समस्या है। हालांकि 102 एम्बुलेंस की सुविधा यहां उपलब्ध है लेकिन यह प्रखंड से बाहर नहीं जा सकता इसलिये किसी भी आपात स्थिति में रोगी को अन्यत्र अग्रसारित करनें में भारी कठिनाई होती है। इस अस्पताल में न तो एक्स-रे की सुविधा है और न ही अल्ट्रासाउंड की सुविधा है। कठिनाई की बात तो यह है कि निजी स्तर से भी इन जांचों की दूर-दूर तक कोई व्यवस्था नहीं है। इस अस्पताल में 13 डाॅक्टरों की जगह 4 डाॅक्टर और 8 नर्सों की जगह एक भी नर्स नहीं है। 40 एएनएम की जगह 13, 6 स्वीपर की जगह 1 स्वीपर, 5 डाटा इन्टीª आॅपरेटर की जगह मात्र 1, सात वार्ड एटेंडेंट की जगह 2 और 8 मजदूर की जगह दो मजदूर ही पदस्थापित हैं। जबकि एलएचवी, बीसीएम, हेल्थ एडुकेटर, हेल्थ इंस्पेक्टर, कालाजार टेक्नीकल सुपरवाईजर, क्लर्क, कम्पाउंडर, रसोईया सहित अन्य कई पद रिक्त ही हैं। मालूम हो कि इस प्राथमिक स्वाथ्य केन्द्र में विभिन्न गांवों से प्रतिदिन लगभग 300 मरीज इलाज कराने हेतु आते हें परन्तु कर्मियों के अभाव में इन मरीजों को भारी परेशानी होती है। वहीं महिला चिकित्सकों की कमी भी इस पीएचसी में नहीं रहने कारण महिला मरीजों को और भी परेशानी होती है. आलम यह है कि जो भी कर्मी यहां पदस्थापित हैं, उनके रहने हेतु आवास की सुविधा तक उपलब्ध नहीं है। ऐसे में मरीजों को किस प्रकार परेशानी होती होगी इसका स्वतः ही अंदाजा लगाया जा सकता है। वहीं पूछने पर प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डाॅ0 बी.के. पासवान बताते हैं कि चिकित्सकों व कर्मियों की कमी के बारे में विभाग को अवगत कराया गया है। साथ ही आवास की अनुपलब्धता के बारे में भी वरीय पदाधिकारियों को लिखा गया है।