All for Joomla All for Webmasters
February 24, 2018
You can use WP menu builder to build menus

पुर्णिया: दहेज बंदी के खिलाफ आंदोलित बिहार को इसके आगे भी जाना है. जिस प्रकार शासन में पूर्ण शराबबंदी के बाद नशा मुक्ति का अभियान चला रखा है उसी प्रकार दहेज बंदी के बाद का लक्ष्य शादी विवाह में सादगी का होना चाहिए. हालांकि इसके उदाहरण भी सामने आने लगे हैं. उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी के पुत्र की शादी का आयोजन लोगों के बीच चर्चा का विषय बना है .शादी में शरीक हुए लोगों से किस प्रकार का उपहार ना लेने का आग्रह किया गया था. फिजूलखर्ची ना हो इसका पूरा ख्याल रखा गया था. वर्तमान समय में विभाग के विचार मात्र से लड़की पक्ष का ध्यान सीधे अपनी गठरी पर जाता है .वह अपनी धन की थैली के आधार पर कन्या के लिए वर ढूढता है. कन्या चाहे उच्च शिक्षा ग्रहण की हो या कम पढ़ी लिखी विभाग के मोर्चे पर उनके अभिभावक एक ही कतार में खड़े दिखते हैं .
जिसके पास जीतना पैसा होगा वह अपनी कन्या के लिए उस स्तर का वर ढूढंता है. हालांकि नई पीढ़ी इस जकरणं से निकल रही है. कम संख्या में ही सही लड़के लड़कियां अपनी पसंद के साथी को अपना रही है .इससे प्रोत्साहन देने की जरूरत जेपी आंदोलन के वक्त बड़ी संख्या में युवाओं ने वगैर दहेज शादी की. कईयों ने अंतरजातीय विवाह भी किया आडंबरों को दफनाया गया. समाज में बड़े बदलाव का माहौल बना लेकिन इस बदलाव की उम्र कम रही .दहेज की जकड़न मजबूत होती गई इसके साथ ही फिजूलखर्ची के कई आइटम आयोजन के साथ जुड़ते चले गए. ऐसे विषम हालात को बदलने के लिए शक्ति लगानी होगी, विग्रह स्वरूप को संवारने के लिए जागरूकता की जरूरत है .समाज को बताने की आवश्यकता है कि विवाह के मायने क्या है .और इस की पवित्रता की रक्षा कैसे की जा सकती है. यह तभी संभव है जब गांव गांव तक नुक्कड़ नाटक, फिल्मों या संवाद संप्रेषण के विभिन्न माध्यम का उपयोग किया जाय.फिलहाल दहेज और बाल विवाह के खिलाफ माहौल बनने लगा है.विशेषकर युवा पीढ़ी को इन दिनों सामाजिक बुराइयों को मिटाने के लिए संकलिप्त होना होगा. साथ ही शासन के स्तर से इस आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने वालो में उत्साह भरते रहना होगा.