‘फिलाटेली-दिवस’ पर डाक टिकट जारी

 

समस्तीपुर से लक्ष्मी प्रसाद

 

बिहार के समस्तीपुर डाक प्रमंडल ‘डाक-सप्ताह’ मना रहा है और इस दरम्यान चौथे दिन समस्तीपुर प्रधान डाकघर द्वारा ‘फिलाटेली-दिवस’ के रूप में मनाया गया। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधान डाकघर के जनसम्पर्क निरीक्षक शैलेश कुमार सिंह कहा कि विश्व की सबसे विशालतम ‘भारतीय डाक’ की शुरुआत ‘लार्ड डलहौज़ी’ के द्वारा देश में 1अक्टूबर सन्1854 ई0 को की गई ,बाद में चलकर 9 अक्टूबर सन् 1874 ई0 को स्विट्ज़रलैंड के ‘बर्न’ में विश्व के 22 देशों के द्वारा एक संयुक्त संधि-पत्र पर हस्ताक्षर किए जाने और सन् 1875 में इस संधि के अस्तित्व में आने के पश्चात् भिन्न-भिन्न देशों के बीच डाक का आदान-प्रदान प्रारम्भ हुआ।उन्होंने डाक डाक-टिकटों के स्वर्णिम इतिहास की चर्चा के क्रम में बताया कि डाक टिकट देश के ऐतिहासिक, प्राकृतिक,साहित्यिक धरोहरों का चित्रण करता है और हाल में डाक विभाग द्वारा रामायण और योग पर डाक टिकट जारी किए गए हैं,और भारत मे पहला डाक टिकट ‘सिंध डाक टिकट’ सन 1852 में जारी हुआ था। डाक महाध्यक्ष अनिल कुमार के माध्यम से प्राप्त जानकारी के अनुसार ब्लैक डाक टिकट जो सन 1840 में जारी हुआ था, का मूल्य आज करोड़ों में है और यह डाक-टिकटों के महत्व को दर्शाता है।आज का डाक-टिकट भविष्य में एक दुर्लभ संग्रह हो सकता है और इनका संग्रह ज्ञानवर्धक और मनोरंजन का शौक हो सकता है।उन्होंने बताया कि फिलाटेली बादशाहों का शौक और शौकों का बादशाह रहा है और देश मे डाक विभाग द्वारा शुरू की गई ‘माई-स्टाम्प’ शौक और डाक-टिकट संग्रहण की दिशा में ‘मील का पत्थर’ साबित होगा।
श्री सिंह ने बताया कि वर्तमान में विश्व की सबसे बड़ी भारतीय डाक-ब्यवस्था प्रणाली में (लगभग) 1,55,015 (एक लाख पचपन हज़ार पंद्रह) डाकघरों के विशालतम नेटवर्क के माध्यम से देश के सुदूर देहात तक में डाक विभाग अपनी सेवाएं दे रहा है तथा ग्राहक सम्बंधित नित्य नई-नई योजनाएं लागू कर रहा है।अपने पारंपरिक कार्यों के साथ -साथ अब डाक विभाग जीवन-बीमा, लघु-बचत,राष्ट्रिय बचत-पत्र, वेस्टर्न यूनियन के माध्यम से ग्राहकों को पैसे भुगतान करना, गंगा-जल बिक्री, स्पीड-पोस्ट , लॉजिस्टिक-पोस्ट, इ-पोस्ट, निबंधित डाक/पार्सल इत्यादि अन्य ढेर सारी सेवा के बाद अब बैंकिंग के क्षेत्र में ‘इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक’ के रूप में नयी भूमिका में नज़र आने वाला है, जिसकी साडी तैयारियां पूरी हो चुकी है और बैंक संचालन हेतु भर्ती की प्रक्रिया भी प्रारम्भ हो चुकी है। ” ग्लोबल मार्केटिंग और प्रतिस्पर्धा की दौर में डाक-विभाग की योजनाओंऔर सेवाओं को जन-जन तक पहुँचाना समय की मांग प्रतीत हो रही है । जहां देश के कुल डाकघरों का 89%डाकघर ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित है । ऐसे में यह परम आवश्यक है की हम अपने उत्पाद और सेवाओं एवं उनसे होने वाले लाभ के साथ-साथ आनेवाली समस्याओं के समाधान की जानकारी ग्राहकों को उपलब्ध् कराएं। मेरा मानना है की चाहे सेवा-शर्त्त कितनी भी अच्छी हो , किन्तु अगर हम गुणवत्तापूर्ण सेवाएं नहीं देंगे तो ग्राहक हमारी सेवा के विकल्प के रूप में उपलब्ध् संस्थानो से सेवा लेंगे, साथ ही जब तक ग्राहकों को हमारी सेवाओं और उत्पादों से मिलने वाले लाभ की जानकारी नहीं होगी तबतक वो भला हमारी सेवाओं का लाभ कैसे ले पायेंगे ? आधुनिक तकनिकी-युग में समय की मांग के अनुरूप डाक-विभाग के हरेक स्तर पर प्रचार-प्रसार की ब्यवस्था एवं जिम्मेदारी तय करना आवश्यक होगा , क्योंकि — ” जो दिखता है वही बिकता है ” . ऐसे में एक जिम्मेदार नागरिक और डाककर्मी के रूप में यह हमारा कर्तव्य है कि जनहित और विभागहित में डाक विभाग की समस्त योजनाओं को धरातल पर उतारने तथा डाक-सेवा को सुलभ बनाने में सक्रिय भूमिका अदा करें। और अंत में एक बात है जो मैं कहना चाहूँगा— कुछ सेवाएं जो देश में पहली बार समस्तीपुर से मैंने विभागहित में निजी-स्तर से शुरू की हैं जैसे —‘जनसम्पर्क निरीक्षक आपके द्वार’ , ‘भारतीय डाक आपकी सेवा में ‘, डाक-शिविर कार्यक्रम’, और ‘पोस्टल हेल्प-लाइनऑन मोबाइल सेवा’—- इन कार्यक्रमों के बारे में आप समय-समय पर अपने बहुमूल्य सुझाव देकर मुझे अनुगृहित करेंगे ताकि डाक सेवाओं को सुलभ और महानगरों के साथ-साथ राजमहलों के चकाचौन्ध से सहमी-शर्मायी गांव की झोपड़ियों में रहनेवाले देश की कुल आबादी का 80% भाग तथा समाज के अंतिम ब्यक्ति तक डाक विभाग की समस्त योजनाओं को पहुँचाया जा सके.

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