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December 11, 2017
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समस्तीपुर से लक्ष्मी प्रसाद/उदय कुमार

 

पूसा। डॉ.राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विवि पूसा स्थित विद्यापति सभागार में गुरुवार को तृतीय अनुसंधान परिषद  (रबी 17) की तीन दिवसीय बैठक कुलपति डॉ.आरसी श्रीवास्तव की अध्यक्षता में आयोजित की गयी। कार्यक्रम का उद्घाटन मौजूद वैज्ञानिको ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर अपने संबोधन में कुलपति डॉ.आरसी श्रीवास्तव ने मौजूद वैज्ञानिको से कहा की वे प्रभेदों का सामाजिक अंकेक्षण करे तथा किसानों के मूलभूत आवश्यकताओ को ध्यान में रखकर अनुसंधान करे। उन्होंने कहा कि कृषि विवि पूसा के वैज्ञानिक जल्द ही बिहार से बाहर निकलकर नए-नए अनुसंधान कार्यो को करेंगे जिसका फायदा दूसरे राज्यो के किसानों को भी मिलेगा। किसानों की आय दोगुनी करने के विषय पर कुलपति ने कहा की इसके लिए कृषि विवि पूसा बिभिन्न परियोजनाओं एवं किसानों के आर्थिक संपोषण पर लगातार प्रयास कर रहा है। विवि जल्द ही बिभिन्न श्रेणी के किसानों के लिए सिंचाई तकनीकों का वैकल्पिक विकल्प भी प्रस्तुत करेगा। डॉ. श्रीवास्तव ने कहा की विवि सौर ऊर्जा के क्षेत्र में व्यापक कार्य कर रहा है, जिसके तहत सिंचाई में लगने वाली लागत को कम किया जा सके। उन्होंनो कहा कि किसानों को कृषि के क्षेत्र में और अधिक नई तकनीकों से जोड़ने के लिए विवि कॉर्नल एवं सिमिट जैसे अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ जल्द ही अनुबंध करने जा रहा है। जिससे अनुसंधानों को और अधिक गति मिलेगी। कार्यक्रम को कुलपति के अलावे राष्ट्रीय आलू अनुसंधान संस्थान शिमला के पूर्व निदेशक डॉ. एसके पांडे ने भी संबोधित किया। उन्होंने कहा की विवि में गुणोत्तर सुधार हो रहा है, हालांकि अनुसंधान के क्षेत्र में अभी और गति लाने की जरूरत है। उन्होंने विवि के वैज्ञानिको से दस बड़े परियाजनाओं को शुरू करने की अपील भी की।

वही आईआईएसडब्लूसी देहरादून के पूर्व प्रधान वैज्ञानिक डॉ. केपी त्रिपाठी ने वैज्ञानिको से मृदा और वातावरण के परिवर्तन के प्रभाव को कम करने के लिए वैकल्पिक तकनीकों पर अनुसंधान करने की जरूरत बताई। कार्यक्रम के अंत मे विवि से जुड़े कई पुस्तको का विमोचन भी किया गया।   मंच संचालन विवि के सह निदेशक अनुसन्धान डॉ.मिथलेश कुमार ने किया। मौके पर डॉ.केपी त्रिपाठी, डॉ.एसके पांडे, डॉ.जेपी उपाध्याय, डॉ.मीरा सिंह, डॉ.मदन सिंह, डॉ.केएम सिंह, डॉ.ब्रजेश साही, डॉ.रविनंदन, डॉ.एसपी सिंह, डॉ.एके मिश्रा, डॉ.एमके वार्ष्णेय, डॉ.आरसी राय, डॉ.अशोक सिंह, डॉ.दिवयांशु शेखर आदि मौजूद थे।